नया प्रयोग क्यों? इससे पत्रकारिता समृद्ध होगी

नया प्रयोग क्यों? इससे पत्रकारिता समृद्ध होगी
- हरिवंश - 

 
अतिथि संपादक का यह प्रयोग सोद्देश्य है. हालांकि हिंदी पत्रकारिता में संभवतया पहला प्रयोग. आज के प्रभात खबर के अतिथि संपादक हैं, विश्व मशहूर आध्यात्मिक व्यक्तित्व श्रीश्री रविशंकर. 
 
आर्ट ऑफ लिविंग (जीने की कला) के प्रणेता और संस्थापक. सात जगहों से छप रहे प्रभात खबर के रोज के कुल इकतीस संस्करणों की एक-एक खबर या सामग्री आज कोई एक संपादक या व्यक्ति नहीं पढ़ या देख पाता, अनेक लोग मिल कर एक साथ यह वृहद कार्य करते और देखते हैं. 
 
फिर अतिथि संपादक का योगदान? अखबार का मूल मर्म क्या हो? उसकी ध्वनि-चिंता और सरोकार क्या हों? इन महत्वपूर्ण सवालों पर श्रीश्री रविशंकर ने गौर किया. आज की महत्वपूर्ण खबरों के बारे में पूछा. प्रभात खबर की वरिष्ठ टीम से परामर्श किया. 
विभिन्न जगहों से छप रहे प्रभात खबर के स्थानीय संपादकों से उन्होंने बात की. स्थानीय या राज्यों की चर्चित खबरों के बारे में पूछा. फिर प्रस्तुति से लेकर खबरों के चयन और उद्देश्य पर चर्चा की. आकर्षक व्यक्तित्व के धनी श्रीश्री रविशकर जी ने कोलकाता प्रभात खबर के कार्यालय में इस अतिथि संपादन के कार्य में समय दिया. संपादन क्रम में उनके साथ प्रभात खबर टीम का गुजरा समय, हुई चर्चा और उनके सुझाव, जीवन, दृष्टि और अनुभव को समृद्ध करनेवाले क्षण हैं.  
 
सन् 1977-78 में टाइम्स ऑफ इडिया समूह मुंबई में ट्रेनी जर्नलिस्ट (प्रशिक्षु) बना. तब एक मशहूर संपादक पत्रकारिता पर पढ़ाने आये. कहा, जर्नलिस्ट यानी जेनरलिस्ट (हरफनमौला) यानी एक पत्रकार को थोड़ा-बहुत हर क्षेत्र के बारे में जानना चाहिए. वह जैक ऑफ ऑल और मास्टर ऑफ नन हो. खेल, फिल्म और संगीत से लेकर, राजनीति, कारोबार, दर्शन सब कुछ वह थोड़ा-बहुत जाने. 
भले ही किसी खास क्षेत्र में वह विशेषज्ञ या पारंगत न हो. उक्त संपादक का आशय था कि अपना ज्ञानसंसार विस्तृत करे. पढ़े- जाने. आज 2006 की दुनिया बिल्कुल अलग है, यह जेनरलिस्ट का युग नहीं, स्पेशलिस्ट (विशेषज्ञ) का दौर है. इस ज्ञानयुग में पत्रकारों से अपेक्षा है कि वे हर विषय में पारंगत हों, पर यथार्थ भिन्न है. हमारी पुरानी पीढ़ी (अज्ञेय, धर्मवीर भारती, रघुवीर सहाय, नारायण दत्त, गणेश मंत्री वगैरह या श्यामलाल, गिरिलाल जैन, निखिल चक्रवर्ती, अजीत भट्टाचार्य, जॉर्ज वगज वगैरह) सचमुच ज्ञानवानों की पीढ़ी थी.
 
चरित्र, चिंतन और विजन की दृष्टि से प्रेरणा देनेवाली. गौरव प्रदान करनेवाली पीढ़ी. आज पत्रकारिता की दुनिया के बारे में धारणा है कि वहा एरोगेस (आक्रामकता) है, ज्ञान का सरोकार कम है. नेटवर्किंग (समाज व सत्ता में शीर्ष के लोगों से संबंध) का महत्व है. आज की पत्रकारिता में शिखर तक जाने के लिए एरोगेस + नेटवर्किंग का समीकरण ज्यादा कारगर है. 
 
हालांकि इस धारणा के अपवाद है, पर यह मान्यता आधारहीन नहीं है. ऐसे दौर में जिन लोगों के प्रयास से करोड़ों-करोड़ लोगों का जीवन समृद्ध हुआ है, जिनकी बात दुनिया में गूंजती है, ऐसे लोगों की दृष्टि से पत्रकारिता समृद्ध होगी. हमने इसीलिए श्रीश्री रविशंकर जी को प्रभात खबर के अतिथि संपादक के रूप में न्योता. उल्लेखनीय है कि श्री रविशंकर जी, राजपुरुष नहीं है, वह किसी बड़े वश या परिवार में नहीं जन्मे और वह अतीत की आभा से बड़े नहीं हुए. उनमें कुछ असाधारण है, जिसने उन्हें पूरी दुनिया में पहुंचा दिया है.
 
बचपन से ही विलक्षण गुणोंवाले श्रीश्री रविशंकर, आज अपने व्यक्तित्व, चिंतन और दृष्टि के कारण करोड़ों लोगों के प्रिय हैं, प्रेरणा स्रोत हैं, द्वीपस्तंभ हैं. उनकी यह प्रेरक दृष्टि प्रभात खबर के पाठकों तक पहुंचे, पत्रकारिता की गुणवत्ता पर उनका सकारात्मक और दूरगामी असर हो, इस प्रयोग के पीछे यही दृष्टि है. प्रभात खबर श्रीश्री रविशंकर और आर्ट ऑफ लिविंग के सभी साथियों का इस कार्य के लिए आभारी है.
 
दिनांक : 25 जुलाई 06